श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.31.23 
तदात्मभरणे चैव मम मातुस्तथैव च।
पर्याप्ता मद्विधानां च भरणाय मनस्विनी॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अतः बुद्धिमान् कौशल्या अपना, मेरी माता का तथा मेरे समान अन्य अनेक लोगों का भरण-पोषण करने में समर्थ हैं॥ 23॥
 
‘Therefore the intelligent Kausalya is capable of supporting herself, my mother and many other people like me.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)