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श्लोक 14
श्लोक
2.31.14
न भरिष्यति कौसल्यां सुमित्रां च सुदु:खिताम्।
भरतो राज्यमासाद्य कैकेय्यां पर्यवस्थित:॥ १४॥
अनुवाद
‘भरत भी राज्य पाकर कैकेयी के अधीन रहने के कारण दुःखी हो रही कौशल्या और सुमित्रा का साथ नहीं देंगे।॥14॥
‘Even Bharata, after getting the kingdom, will not support Kausalya and Sumitra who are suffering because of being under the rule of Kaikeyi.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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