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ramayan 2.31.12: जैसे बादल पृथ्वी पर जल बरसाते हैं, वैसे ही सबकी कामनाओं को पूर्ण करने वाले पराक्रमी राजा दशरथ अब कैकेयी के मोह में फँस गए हैं॥12॥   |   ramayan सर्ग 2.31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.31.12 
अभिवर्षति कामैर्य: पर्जन्य: पृथिवीमिव।
स कामपाशपर्यस्तो महातेजा महीपति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल पृथ्वी पर जल बरसाते हैं, वैसे ही सबकी कामनाओं को पूर्ण करने वाले पराक्रमी राजा दशरथ अब कैकेयी के मोह में फँस गए हैं॥12॥
 
Just like the clouds pour water on the earth, similarly the mighty King Dasharatha who used to fulfill everyone's desires is now caught in the love of Kaikeyi.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)