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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना
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श्लोक 11
श्लोक
2.31.11
मयाद्य सह सौमित्रे त्वयि गच्छति तद्वनम्।
को भजिष्यति कौसल्यां सुमित्रां वा यशस्विनीम्॥ ११॥
अनुवाद
'सुमित्रानन्दन! यदि आज आप भी मेरे साथ वन में चले जाएँ, तो परमायाशस्विनी माता कौशल्या और सुमित्रा की सेवा कौन करेगा? 11॥
'Sumitranandan! If you also go to the forest with me today, then who will serve Paramayashaswini Mata Kausalya and Sumitra? 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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