Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.31.10: 'लक्ष्मण! तुम मेरे मित्र हो, धर्मात्मा, वीर, धैर्यवान और सदा सत्यमार्ग पर दृढ़ रहने वाले हो। तुम मुझे प्राणों के समान प्रिय हो और मेरे आज्ञाकारी तथा सदा मेरे वश में रहने वाले मित्र हो।॥10॥ | ramayan सर्ग 2.31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'लक्ष्मण! तुम मेरे मित्र हो, धर्मात्मा, वीर, धैर्यवान और सदा सत्यमार्ग पर दृढ़ रहने वाले हो। तुम मुझे प्राणों के समान प्रिय हो और मेरे आज्ञाकारी तथा सदा मेरे वश में रहने वाले मित्र हो।॥10॥
‘Lakshmana! You are my friend, pious, brave and patient and always steadfast in the right path. You are dear to me like my life and you are my obedient and obedient friend who is always under my control.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥