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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना
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श्लोक 6
श्लोक
2.30.6
द्युमत्सेनसुतं वीरं सत्यवन्तमनुव्रताम्।
सावित्रीमिव मां विद्धि त्वमात्मवशवर्तिनीम्॥ ६॥
अनुवाद
जैसे सावित्री द्युमत्सेन के वीर पुत्र सत्यवान् की अनुचरिणी थी, उसी प्रकार आप मुझे भी अपनी आज्ञा के अधीन ही समझें॥6॥
Just as Savitri was the follower of Satyavan, the brave son of Dyumatsena, in the same way you should also consider me to be under your command.॥ 6॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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