Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.30.47: तत्पश्चात्, अपनी इच्छा पूर्ण होने पर, यशस्विनी और मनस्विनी सीता, देवी स्वामी की आज्ञा मानकर, अत्यन्त प्रसन्नता से भरकर, धर्मात्मा ब्राह्मणों को धन और रत्न दान करने के लिए तत्पर हो गईं। | ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, अपनी इच्छा पूर्ण होने पर, यशस्विनी और मनस्विनी सीता, देवी स्वामी की आज्ञा मानकर, अत्यन्त प्रसन्नता से भरकर, धर्मात्मा ब्राह्मणों को धन और रत्न दान करने के लिए तत्पर हो गईं।
Thereafter, having fulfilled their wish, Yashswini and Manaswini Sita, filled with great joy, after considering the orders of Devi Swami, got ready to donate money and gems to the righteous Brahmins.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रिंश: सर्ग:॥ ३०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥