श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.30.37 
देवगन्धर्वगोलोकान् ब्रह्मलोकांस्तथापरान्।
प्राप्नुवन्ति महात्मानो मातापितृपरायणा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
‘जो महात्मा पुरुष अपने माता-पिता की सेवा में लगे रहते हैं, वे देवलोक, गन्धर्वलोक, ब्रह्मलोक, गोलोक तथा अन्य लोकों को भी प्राप्त करते हैं ॥37॥
 
‘Mahatma men who are engaged in the service of their parents attain Devlok, Gandharvalok, Brahmalok, Golok and other worlds also. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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