श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.30.34 
यत्र त्रयं त्रयो लोका: पवित्रं तत्समं भुवि।
नान्यदस्ति शुभापाङ्गे तेनेदमभिराध्यते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे सुन्दर नेत्रों वाली सीता! इस पृथ्वी पर माता, पिता और गुरु के समान कोई अन्य पवित्र देवता नहीं हैं, जिनकी पूजा से धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति होती है तथा तीनों लोकों की पूजा सिद्ध होती है। इसीलिए पृथ्वी के निवासी इन तीनों देवताओं की पूजा करते हैं॥ 34॥
 
'O Sita with beautiful eye sockets! There is no other holy deity on this earth like the mother, father and Guru, whose worship gives one Dharma, Artha and Kama and the worship of the three worlds is accomplished. That is why the inhabitants of the earth worship these three gods.॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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