Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.30.33: जो अदृश्य देवता अपनी सेवा में नहीं है, उनकी पूजा नाना प्रकार से कैसे की जा सकती है, जबकि जो दृश्य देवता अपनी सेवा में हैं, अर्थात् माता, पिता और गुरु, उनका उल्लंघन किया जा सकता है?॥ 33॥ | ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्वाधीनं कथं दैवं प्रकारैरभिराध्यते।
स्वाधीनं समतिक्रम्य मातरं पितरं गुरुम्॥ ३३॥
अनुवाद
जो अदृश्य देवता अपनी सेवा में नहीं है, उनकी पूजा नाना प्रकार से कैसे की जा सकती है, जबकि जो दृश्य देवता अपनी सेवा में हैं, अर्थात् माता, पिता और गुरु, उनका उल्लंघन किया जा सकता है?॥ 33॥
'How can one worship the invisible deity, Devta, who is not under one's service, in various ways, while violating the visible deities, i.e. mother, father and Guru, who are under one's service?॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥