Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.30.29: ‘मिथिलेशकुमारी! चूँकि तुम मेरे साथ वन में रहने के लिए उत्पन्न हुई हो, इसलिए मैं तुम्हें नहीं त्याग सकता, जैसे आत्मज्ञानी पुरुष अपने स्वाभाविक सुख को नहीं त्यागता॥ 29॥ | ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘मिथिलेशकुमारी! चूँकि तुम मेरे साथ वन में रहने के लिए उत्पन्न हुई हो, इसलिए मैं तुम्हें नहीं त्याग सकता, जैसे आत्मज्ञानी पुरुष अपने स्वाभाविक सुख को नहीं त्यागता॥ 29॥
‘Mithileshakumari! Since you were born to live with me in the forest, I cannot abandon you, just as a self-realized person does not abandon his natural happiness.॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥