श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.30.27 
न देवि बत दु:खेन स्वर्गमप्यभिरोचये।
नहि मेऽस्ति भयं किंचित् स्वयम्भोरिव सर्वत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'देवि! यदि आपको दुःख देकर मुझे स्वर्ग का सुख भी मिले, तो भी मैं उसे नहीं लेना चाहता। स्वयंभू ब्रह्माजी की तरह मुझे किसी का भी भय नहीं है।' 27॥
 
'Goddess! If I get the happiness of heaven by giving you sorrow, I would not want to take that too. Like Swayambhu Brahmaji, I have no fear of anyone at all. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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