श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.30.26 
तां परिष्वज्य बाहुभ्यां विसंज्ञामिव दु:खिताम्।
उवाच वचनं राम: परिविश्वासयंस्तदा॥२६॥
 
 
अनुवाद
सीताजी शोक के कारण अचेत हो रही थीं। श्री रामचन्द्रजी ने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर हृदय से लगा लिया और उन्हें सान्त्वना देते हुए कहा -॥26॥
 
Sitaji was becoming unconscious due to grief. Shri Ramchandraji held her with both his hands and embraced her and while consoling her said -॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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