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ramayan 2.30.23: जैसे बहुत से बुझे हुए बाणों से हथिनी घायल हो जाती है, वैसे ही श्री रामजी के बहुत से वचनों से सीताजी को बहुत दुःख हुआ; अतः जैसे अग्निशामक हंडे से अग्नि प्रज्वलित होती है, वैसे ही वे बहुत समय से रोके हुए आँसुओं को बहाने लगीं॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.30.23 
सा विद्धा बहुभिर्वाक्यैर्दिग्धैरिव गजाङ्गना।
चिरसंनियतं बाष्पं मुमोचाग्निमिवारणि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जैसे बहुत से बुझे हुए बाणों से हथिनी घायल हो जाती है, वैसे ही श्री रामजी के बहुत से वचनों से सीताजी को बहुत दुःख हुआ; अतः जैसे अग्निशामक हंडे से अग्नि प्रज्वलित होती है, वैसे ही वे बहुत समय से रोके हुए आँसुओं को बहाने लगीं॥ 23॥
 
Just as a female elephant is wounded by a large number of extinguished arrows, similarly Sita was deeply hurt by the numerous words of Shri Rama; hence, just as a fire-fighting cauldron brings forth fire, in the same way she began to shed the tears that she had been holding back for a long time.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)