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ramayan 2.30.22: इस प्रकार बहुत देर तक दयनीय पीड़ा में विलाप करती हुई सीता शोक से विह्वल हो गईं और दुर्बल होकर अपने पति को कसकर पकड़कर हृदय से लगाकर जोर-जोर से रोने लगीं।   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.30.22 
इति सा शोकसंतप्ता विलप्य करुणं बहु।
चुक्रोश पतिमायस्ता भृशमालिङ्गॺ सस्वरम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बहुत देर तक दयनीय पीड़ा में विलाप करती हुई सीता शोक से विह्वल हो गईं और दुर्बल होकर अपने पति को कसकर पकड़कर हृदय से लगाकर जोर-जोर से रोने लगीं।
 
Having thus lamented for a long time in pitiable torment, Sita, overcome with grief, became weak and holding her husband tightly and embracing him tightly, began to weep profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)