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ramayan 2.30.19: 'मैं वनवास के दुःख से नहीं डरता। यदि इस अवस्था में भी आप मुझे अपने साथ वन में नहीं ले जाएँगे, तो मैं आज ही विष पी लूँगा, परन्तु शत्रुओं के आगे समर्पण नहीं करूँगा।॥19॥   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.30.19 
अथ मामेवमव्यग्रां वनं नैव नयिष्यसे।
विषमद्यैव पास्यामि मा वशं द्विषतां गमम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'मैं वनवास के दुःख से नहीं डरता। यदि इस अवस्था में भी आप मुझे अपने साथ वन में नहीं ले जाएँगे, तो मैं आज ही विष पी लूँगा, परन्तु शत्रुओं के आगे समर्पण नहीं करूँगा।॥19॥
 
'I am not afraid of the pain of exile. If even in this condition you do not take me with you to the forest, I will drink poison today itself, but will not surrender to the enemies.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)