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ramayan 2.30.17: वहाँ रहते हुए तुम्हें मेरा कोई प्रतिकूल आचरण नहीं दिखेगा। तुम्हें मेरे लिए कोई कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। मेरा निर्वाह तुम्हारे लिए कठिन नहीं होगा।॥17॥   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.30.17 
न च तत्र तत: किंचिद् द्रष्टुमर्हसि विप्रियम्।
मत्कृते न च ते शोको न भविष्यामि दुर्भरा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहते हुए तुम्हें मेरा कोई प्रतिकूल आचरण नहीं दिखेगा। तुम्हें मेरे लिए कोई कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। मेरा निर्वाह तुम्हारे लिए कठिन नहीं होगा।॥17॥
 
‘While staying there you will not see any unfavorable behavior of mine. You will not have to bear any trouble for me. My survival will not be difficult for you.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)