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ramayan 2.30.16: 'मैं ऋतु के अनुसार जो भी फल-फूल उपलब्ध होंगे, उन्हें खाऊँगा तथा माता-पिता और महल को कभी याद नहीं करूँगा।॥16॥   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.30.16 
न मातुर्न पितुस्तत्र स्मरिष्यामि न वेश्मन:।
आर्तवान्युपभुञ्जाना पुष्पाणि च फलानि च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'मैं ऋतु के अनुसार जो भी फल-फूल उपलब्ध होंगे, उन्हें खाऊँगा तथा माता-पिता और महल को कभी याद नहीं करूँगा।॥16॥
 
'I shall eat whatever fruits and flowers are available in accordance with the season and shall never remember my parents or the palace.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)