श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.30.13 
महावातसमुद्भूतं यन्मामवकरिष्यति।
रजो रमण तन्मन्ये परार्घ्यमिव चन्दनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'हे प्रिये! प्रचण्ड आँधी के कारण जो धूल मेरे शरीर पर गिरेगी, उसे मैं उत्तम चन्दन के समान समझूँगा।
 
'My dear one! The dust that falls on my body due to the strong storm, I will consider it to be like the finest sandalwood.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas