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कुशकाशशरेषीका ये च कण्टकिनो द्रुमा:।
तूलाजिनसमस्पर्शा मार्गे मम सह त्वया॥ १२॥
अनुवाद
'मार्ग में मुझे जो कुश, सरकंडे, कांटे और कंटीले वृक्ष मिलेंगे, उनका स्पर्श मुझे आपके साथ रहने के कारण कपास और मृगचर्म के समान सुखदायी लगेगा।
'The touch of the Kush-Kaas, reeds, thorns and thorny trees that I will come across on the way will seem as pleasant to me as cotton and deerskin because of your presence in my company.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥