Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.30.10: अतः मुझे साथ लिए बिना तुम्हारा वन में जाना उचित नहीं है। चाहे तप करना हो, चाहे वन में रहना हो, चाहे स्वर्ग जाना हो, मैं सर्वत्र तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ॥10॥ | ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मामनादाय वनं न त्वं प्रस्थितुमर्हसि।
तपो वा यदि वारण्यं स्वर्गो वा स्यात् त्वया सह॥ १०॥
अनुवाद
अतः मुझे साथ लिए बिना तुम्हारा वन में जाना उचित नहीं है। चाहे तप करना हो, चाहे वन में रहना हो, चाहे स्वर्ग जाना हो, मैं सर्वत्र तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ॥10॥
‘Therefore it is not right for you to go to the forest without taking me along with you. Whether it is to do penance, live in the forest or go to heaven, I want to be with you everywhere.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥