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ramayan 2.30.1: श्री राम के समझाने पर मिथिला की पुत्री जानकी ने वनवास की अनुमति प्राप्त करने के लिए पुनः अपने पति से इस प्रकार बात की ॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.30.1 
सान्त्व्यमाना तु रामेण मैथिली जनकात्मजा।
वनवासनिमित्तार्थं भर्तारमिदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के समझाने पर मिथिला की पुत्री जानकी ने वनवास की अनुमति प्राप्त करने के लिए पुनः अपने पति से इस प्रकार बात की ॥1॥
 
Upon Shri Rama's persuasion, Mithila's daughter Janaki again spoke to her husband in this manner to obtain permission for exile. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)