श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 3: राज्याभिषेक की तैयारी , राजा दशरथ का श्रीराम को राजनीति की बातें बताना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  2.3.23-24h 
स तथेति प्रतिज्ञाय सुमन्त्रो राजशासनात्॥ २३॥
रामं तत्रानयांचक्रे रथेन रथिनां वरम्।
 
 
अनुवाद
फिर 'जैसी आपकी इच्छा' कहकर सुमंत गए और राजा की आज्ञा के अनुसार रथियों में श्रेष्ठ श्री राम को लाकर रथ पर बिठाया।
 
Then saying 'as you wish', Sumanta went and as per the king's orders, he brought Shri Ram, the best of charioteers, seated him on the chariot. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)