मृगा: सिंहा गजाश्चैव शार्दूला: शरभास्तथा।
चमरा: सृमराश्चैव ये चान्ये वनचारिण:॥ ३॥
अदृष्टपूर्वरूपत्वात् सर्वे ते तव राघव।
रूपं दृष्ट्वापसर्पेयुस्तव सर्वे हि बिभ्यति॥ ४॥
अनुवाद
'रघुनंदन! मृग, सिंह, हाथी, सिंह, शरभ, चमरी गाय, नीलगाय आदि सभी वन्य प्राणी आपके रूप को देखकर भाग जाएँगे; क्योंकि उन्होंने ऐसा प्रभावशाली रूप पहले कभी नहीं देखा होगा। आपसे तो सभी लोग डरते हैं; फिर वे प्राणी क्यों नहीं डरेंगे?॥ 3-4॥
‘Raghunandan! The deer, lion, elephant, lion, Sharabha, Chamri cow, Nilgai and other wild animals will all run away on seeing your form; because they would have never seen such an impressive form before. Everyone is afraid of you; then why won't those animals be afraid?॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)