श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.29.23 
एवमुक्ता तु सा चिन्तां मैथिली समुपागता।
स्नापयन्तीव गामुष्णैरश्रुभिर्नयनच्युतै:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उसके इस प्रकार अस्वीकार करने पर मिथिला की पुत्री सीता अत्यन्त चिन्तित हो गई और अपनी आँखों से गर्म आँसुओं की धारा बहाकर भूमि को गीला करने लगी॥ 23॥
 
After his rejection in this manner, Sita, the daughter of Mithila, became very worried and began to wet the ground with hot tears shedding from her eyes.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)