vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना
»
श्लोक 22
श्लोक
2.29.22
एवं बहुविधं तं सा याचते गमनं प्रति।
नानुमेने महाबाहुस्तां नेतुं विजनं वनम्॥ २२॥
अनुवाद
सीताजी वन जाने के लिए अनेक प्रकार से विनती कर रही थीं, किन्तु महाबाहु श्री राम ने उन्हें अपने साथ निर्जन वन में ले जाने की अनुमति नहीं दी।
In many ways, Sitaji was pleading to go to the forest, but the mighty-armed Shri Ram did not allow her to be taken with him to the deserted forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×