vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना
»
श्लोक 19
श्लोक
2.29.19
एवमस्मात् स्वकां नारीं सुवृत्तां हि पतिव्रताम्।
नाभिरोचयसे नेतुं त्वं मां केनेह हेतुना॥ १९॥
अनुवाद
'मैं आपकी पत्नी हूँ, उत्तम व्रतों का पालन करती हूँ और पतिव्रता हूँ, फिर आप मुझे यहाँ से अपने साथ ले जाने को क्यों तैयार नहीं हैं?॥19॥
'I am your wife, I observe the best vows and I am faithful to my husband, then why am I not willing to take me with you from here?॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×