श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.29.11 
कृतादेशा भविष्यामि गमिष्यामि त्वया सह।
कालश्चायं समुत्पन्न: सत्यवान् भवतु द्विज:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यदि ऐसा होगा, तो मैं उस प्रारब्ध का फल भोगूँगा। उसका समय आ गया है, अतः मुझे आपके साथ चलना चाहिए; इससे उस ब्राह्मण का वचन भी सत्य सिद्ध होगा।॥11॥
 
‘If this happens, I will enjoy the fruits of that destiny. The time has come for that, therefore I must come with you; this will also prove the words of that Brahmin true. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)