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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना
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श्लोक 7
श्लोक
2.26.7
तां दृष्ट्वा स हि धर्मात्मा न शशाक मनोगतम्।
तं शोकं राघव: सोढुं ततो विवृततां गत:॥ ७॥
अनुवाद
धर्मात्मा श्री राम सीता को देखकर अपने मानसिक शोक की तीव्रता को सहन नहीं कर सके, इसलिए उनका शोक प्रकट हो गया ॥7॥
The virtuous Shri Ram could not bear the intensity of his mental grief on seeing Sita; hence his grief became manifest. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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