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श्लोक  2.26.6 
अथ सीता समुत्पत्य वेपमाना च तं पतिम्।
अपश्यच्छोकसंतप्तं चिन्ताव्याकुलितेन्द्रियम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सीता उसे देखते ही अपने स्थान से उठ खड़ी हुईं। उनकी यह दशा देखकर वे काँपने लगीं और अपने शोकग्रस्त पति की ओर देखने लगीं, जिनकी इन्द्रियाँ चिंता से व्याकुल थीं।
 
Sita stood up from her seat as soon as she saw him. She began to tremble on seeing his condition and began to gaze at her grief-stricken husband whose senses were troubled with worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)