Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.38: 'प्रिये! अब मैं उस विशाल वन में जाऊँगा। भामिनी! तुम्हें यहीं रहना होगा। यहाँ मेरी आज्ञा का पालन करते हुए यह ध्यान रखना कि तुम्हारे आचरण से किसी को कष्ट न हो।'॥38॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहं गमिष्यामि महावनं प्रिये
त्वया हि वस्तव्यमिहैव भामिनि।
यथा व्यलीकं कुरुषे न कस्यचित्
तथा त्वया कार्यमिदं वचो मम॥ ३८॥
अनुवाद
'प्रिये! अब मैं उस विशाल वन में जाऊँगा। भामिनी! तुम्हें यहीं रहना होगा। यहाँ मेरी आज्ञा का पालन करते हुए यह ध्यान रखना कि तुम्हारे आचरण से किसी को कष्ट न हो।'॥38॥
'Dear! Now I will go to that huge forest. Bhaamini! You will have to stay here. You should keep following my orders here while keeping in mind that your behavior should not cause any trouble to anyone.'॥ 38॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षड्विंश: सर्ग:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छब्बीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥