vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना
»
श्लोक 37
श्लोक
2.26.37
सा त्वं वसेह कल्याणि राज्ञ: समनुवर्तिनी।
भरतस्य रता धर्मे सत्यव्रतपरायणा॥ ३७॥
अनुवाद
'अतः कल्याणी! तुम राजा भरत के अनुकूल आचरण करते हुए धर्म और व्रत में तत्पर होकर यहाँ निवास करो॥37॥
'So Kalyani! You, behaving in a manner favorable to King Bharata, reside here, being committed to religion and fasting. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×