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औरस्यानपि पुत्रान् हि त्यजन्त्यहितकारिण:।
समर्थान् सम्प्रगृह्णन्ति जनानपि नराधिपा:॥ ३६॥
अनुवाद
राजा लोग अपकार करनेवालों को त्याग देते हैं, चाहे वे उनके अपने पुत्र ही क्यों न हों, और जो उनके निकट नहीं होते, किन्तु शक्तिशाली होते हैं, उन्हें वे अपना बना लेते हैं॥ 36॥
'Kings forsake those who do harm, even if they are their own sons, and those who are not close to them but are powerful, they adopt as their own.॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥