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आराधिता हि शीलेन प्रयत्नैश्चोपसेविता:।
राजान: सम्प्रसीदन्ति प्रकुप्यन्ति विपर्यये॥ ३५॥
अनुवाद
‘यदि राजा उचित आचरण से पूजे जाएँ और यत्नपूर्वक सेवा की जाए, तो वे प्रसन्न होते हैं और यदि उनके साथ प्रतिकूल व्यवहार किया जाए, तो वे क्रोधित होते हैं॥ 35॥
‘Kings become pleased when they are worshipped with appropriate conduct and served with effort, and become angry when they are treated in an unfavorable manner.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥