Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.33: भरत और शत्रुघ्न मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं, इसलिए तुम्हें उन पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिए और उनके साथ अपने भाई और पुत्र के समान व्यवहार करना चाहिए॥ 33॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत और शत्रुघ्न मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं, इसलिए तुम्हें उन पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिए और उनके साथ अपने भाई और पुत्र के समान व्यवहार करना चाहिए॥ 33॥
'Bharata and Shatrughna are dearer to me than my life, therefore you should especially look upon them and treat them like your brother and son.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥