Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.31: मेरी माता कौशल्या को भी नमस्कार करना चाहिए। एक तो वे वृद्धा हो गई हैं और दूसरे दुःख और पीड़ा के कारण दुर्बल हो गई हैं; अतः धर्म का ध्यान रखते हुए वे आपके विशेष आदर की पात्र हैं॥31॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माता च मम कौसल्या वृद्धा संतापकर्शिता।
धर्ममेवाग्रत: कृत्वा त्वत्त: सम्मानमर्हति॥ ३१॥
अनुवाद
मेरी माता कौशल्या को भी नमस्कार करना चाहिए। एक तो वे वृद्धा हो गई हैं और दूसरे दुःख और पीड़ा के कारण दुर्बल हो गई हैं; अतः धर्म का ध्यान रखते हुए वे आपके विशेष आदर की पात्र हैं॥31॥
‘My mother Kausalya should also be saluted. Firstly she has grown old and secondly she has become weak due to pain and suffering; therefore keeping Dharma in mind, she deserves special respect from you.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥