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ramayan 2.26.30: 'प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर विधिपूर्वक देवताओं का पूजन करने के पश्चात् तुम्हें मेरे पिता राजा दशरथ का पूजन करना चाहिए।   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.26.30 
कल्यमुत्थाय देवानां कृत्वा पूजां यथाविधि।
वन्दितव्यो दशरथ: पिता मम जनेश्वर:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर विधिपूर्वक देवताओं का पूजन करने के पश्चात् तुम्हें मेरे पिता राजा दशरथ का पूजन करना चाहिए।
 
'Every morning after getting up and worshipping the gods in a proper manner, you should offer prayers to my father, King Dasharatha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)