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ramayan 2.26.28: मैं भी आज अपने पिता की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए वन में जाऊँगा। मनस्विनी! तुम धैर्य रखो॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.26.28 
अहं चापि प्रतिज्ञां तां गुरो: समनुपालयन्।
वनमद्यैव यास्यामि स्थिरीभव मनस्विनि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं भी आज अपने पिता की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए वन में जाऊँगा। मनस्विनी! तुम धैर्य रखो॥ 28॥
 
‘I will also go to the forest today to fulfill my father's promise. Manasvini! You must be patient.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)