श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.26.27 
तस्मै दत्तं नृपतिना यौवराज्यं सनातनम्।
स प्रसाद्यस्त्वया सीते नृपतिश्च विशेषत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सीता! राजा ने उसे सदा के लिए युवराज बना दिया है, अतः तुम्हें उसे प्रसन्न रखने के लिए विशेष प्रयत्न करना चाहिए, क्योंकि अब वही राजा होगा।
 
Sita! The king has made him the crown prince forever, so you should make special efforts to keep him happy because now he will be the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)