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श्लोक  2.26.20 
कुले महति सम्भूते धर्मज्ञे धर्मचारिणि।
शृणु जानकि येनेदं क्रमेणाद्यागतं मम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे महान कुल में जन्मी, धर्म को जानने वाली और धर्म परायण जनकनंदिनी! आज मुझे जो वनवास मिला है, उसका कारण मैं तुम्हें क्रमशः बताता हूँ। सुनो।
 
'O Janakanandini, born in a great family, knowing the Dharma and devoted to Dharma! I will tell you step by step the reason why I have been given this exile today. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)