Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.15: चार वेगवान घोड़ों से जुता हुआ और सुवर्णमय आभूषणों से विभूषित वह उत्तम पुष्परथ (केवल यात्रा के लिए प्रयुक्त होने वाला पुष्पों से सुसज्जित रथ) आज तुम्हारे आगे क्यों नहीं चल रहा है?॥ 15॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्भिर्वेगसम्पन्नैर्हयै: काञ्चनभूषणै:।
मुख्य: पुष्परथो युक्त: किं न गच्छति तेऽग्रत:॥ १५॥
अनुवाद
चार वेगवान घोड़ों से जुता हुआ और सुवर्णमय आभूषणों से विभूषित वह उत्तम पुष्परथ (केवल यात्रा के लिए प्रयुक्त होने वाला पुष्पों से सुसज्जित रथ) आज तुम्हारे आगे क्यों नहीं चल रहा है?॥ 15॥
'Why is the excellent Pushparath (flower-decorated chariot used only for travelling) drawn by four swift horses and adorned with golden ornaments not moving ahead of you today?॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥