Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.10: मैं देख रहा हूँ कि इस समय तुम्हारा सुन्दर मुख जल के फेन के समान चमक नहीं रहा है और न ही सौ आरों वाले श्वेत छत्र से ढका हुआ है, इसलिए वह अधिक सुन्दर नहीं लग रहा है॥ 10॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते शतशलाकेन जलफेननिभेन च।
आवृतं वदनं वल्गु च्छत्रेणाभिविराजते॥ १०॥
अनुवाद
मैं देख रहा हूँ कि इस समय तुम्हारा सुन्दर मुख जल के फेन के समान चमक नहीं रहा है और न ही सौ आरों वाले श्वेत छत्र से ढका हुआ है, इसलिए वह अधिक सुन्दर नहीं लग रहा है॥ 10॥
'I see that at this time your beautiful face is not shining like the foam of water and is not covered with the white umbrella having a hundred spokes and hence does not look very beautiful.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥