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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना
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श्लोक 5
श्लोक
2.25.5
यानि दत्तानि तेऽस्त्राणि विश्वामित्रेण धीमता।
तानि त्वामभिरक्षन्तु गुणै: समुदितं सदा॥ ५॥
अनुवाद
'तुम उत्तम गुणों से प्रकाशित हो; बुद्धिमान विश्वामित्र द्वारा तुम्हें दिए गए समस्त अस्त्र-शस्त्र सब ओर से तुम्हारी सदैव रक्षा करें। ॥5॥
'You are illuminated with good virtues; may all the weapons given to you by the wise Visvamitra protect you from all sides at all times. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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