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ramayan 2.25.35: 'श्रीराम! आपको भी वही शुभ प्राप्त हो जो तीन पग आगे बढ़ते हुए अतुलनीय तेजस्वी भगवान विष्णु को अर्पित किया गया था।' 35.   |   ramayan सर्ग 2.25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.25.35 
त्रिविक्रमान् प्रक्रमतो विष्णोरतुलतेजस:।
यदासीन्मङ्गलं राम तत् ते भवतु मङ्गलम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! आपको भी वही शुभ प्राप्त हो जो तीन पग आगे बढ़ते हुए अतुलनीय तेजस्वी भगवान विष्णु को अर्पित किया गया था।' 35.
 
'Shri Ram! May you also receive the same auspiciousness that was offered to the incomparably illustrious Lord Vishnu while taking three steps forward.' 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)