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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.24.5 
नूनं तु बलवाँल्लोके कृतान्त: सर्वमादिशन्।
लोके रामाभिरामस्त्वं वनं यत्र गमिष्यसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! वास्तव में, इस संसार में ईश्वर ही सबसे अधिक शक्तिशाली है। उसकी आज्ञा सब पर प्रबल है - वह सबको सुख-दुःख में एक करता है; क्योंकि उसके प्रभाव से आप जैसा लोकप्रिय व्यक्ति भी वन जाने को तैयार हो जाता है।'
 
‘Shri Ram! Indeed, God is the most powerful being in this world. His command prevails over everyone – he unites everyone with happiness and sorrow; because under his influence, even a popular person like you is ready to go to the forest. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)