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ramayan 2.24.38: जब देवी कौशल्या ने देखा कि श्री राम ने वनवास जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है, तब उन्होंने हृदय में अत्यंत आदर के साथ उन्हें शुभ आशीर्वाद देने और उनके लिए शुभ पाठ करवाने की इच्छा की॥ 38॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.24.38 
तथा हि रामं वनवासनिश्चितं
ददर्श देवी परमेण चेतसा।
उवाच रामं शुभलक्षणं वचो
बभूव च स्वस्त्ययनाभिकांक्षिणी॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जब देवी कौशल्या ने देखा कि श्री राम ने वनवास जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है, तब उन्होंने हृदय में अत्यंत आदर के साथ उन्हें शुभ आशीर्वाद देने और उनके लिए शुभ पाठ करवाने की इच्छा की॥ 38॥
 
When Goddess Kausalya saw that Sri Rama had thus firmly resolved to go on exile, she with utmost respect in her heart desired to give him auspicious blessings and to have the auspicious recitations done for him.॥ 38॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे चतुर्विंश: सर्ग:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)