Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.24.35: 'पुत्र रघुनन्दन! इस पृथ्वी पर भगवान् की लीलाओं को समझना बहुत कठिन है, जो मुझे रोककर तुम्हें वन जाने के लिए उकसा रहे हैं॥ 35॥ | ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतान्तस्य गति: पुत्र दुर्विभाव्या सदा भुवि।
यस्त्वां संचोदयति मे वच आविध्य राघव॥ ३५॥
अनुवाद
'पुत्र रघुनन्दन! इस पृथ्वी पर भगवान् की लीलाओं को समझना बहुत कठिन है, जो मुझे रोककर तुम्हें वन जाने के लिए उकसा रहे हैं॥ 35॥
'Son Raghunandan! It is very difficult to understand the actions of God on this earth, who is interrupting me and instigating you to go to the forest.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥