श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  2.24.30-31h 
प्राप्स्यसे परमं कामं मयि पर्यागते सति॥ ३०॥
यदि धर्मभृतां श्रेष्ठो धारयिष्यति जीवितम्।
 
 
अनुवाद
'यदि पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ महाराज जीवित रहें तो मेरे लौटने पर आपकी भी शुभ इच्छा पूरी हो जाएगी।'
 
'If the Maharaja, the best among the virtuous, remains alive, then on my return your good wish will also be fulfilled.'
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