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ramayan 2.24.3: 'जिनके सेवक और दास भी शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन करते हैं, वे श्री राम वन में कंद-मूल और फल कैसे खाएँगे?॥3॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.24.3 
यस्य भृत्याश्च दासाश्च मृष्टान्यन्नानि भुञ्जते।
कथं स भोक्ष्यते रामो वने मूलफलान्ययम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'जिनके सेवक और दास भी शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन करते हैं, वे श्री राम वन में कंद-मूल और फल कैसे खाएँगे?॥3॥
 
'How will Shri Ram, whose servants and slaves also eat pure and tasty food, eat roots and fruits in the forest?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)