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ramayan 2.24.29-30h: 'इस प्रकार, तुम्हें नियमित रूप से भोजन करते हुए और नियमों का पालन करते हुए अपने स्वामी की सेवा करते रहना चाहिए। मेरे आगमन की कामना करते हुए, तुम्हें उचित समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।'   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  2.24.29-30h 
एवं कालं प्रतीक्षस्व ममागमनकांक्षिणी॥ २९॥
नियता नियताहारा भर्तृशुश्रूषणे रता।
 
 
अनुवाद
'इस प्रकार, तुम्हें नियमित रूप से भोजन करते हुए और नियमों का पालन करते हुए अपने स्वामी की सेवा करते रहना चाहिए। मेरे आगमन की कामना करते हुए, तुम्हें उचित समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।'
 
'Thus, you should continue to serve your master by eating regularly and following the rules. Desiring my arrival, you should wait for the right time.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)